Skip to content
Home » Videos » मुंबई की गलियों का क्रिकेट: जहां हर बच्चा खुद को सचिन और रोहित समझकर खेलता है!

मुंबई की गलियों का क्रिकेट: जहां हर बच्चा खुद को सचिन और रोहित समझकर खेलता है!

मुंबई की गलियों में बसता है असली क्रिकेट

भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं है। यह लोगों की भावनाओं का हिस्सा है। लेकिन अगर क्रिकेट की असली आत्मा कहीं दिखाई देती है, तो वह मुंबई की गलियों में दिखाई देती है। यहां हर छोटी गली, हर चॉल और हर मैदान में बच्चे बल्ला लेकर ऐसे उतरते हैं, जैसे वे अगले सचिन तेंदुलकर बनने वाले हों। OLDISGOLDFILMS आज आपको उसी दुनिया में लेकर चल रहा है, जहां टेनिस बॉल से शुरू हुए सपने अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम तक पहुंचते हैं।

जब गली ही बन जाती है वानखेड़े स्टेडियम

मुंबई की तंग गलियों में खेलने वाले बच्चों के लिए सड़क ही उनका मैदान होती है। कहीं ईंटों को विकेट बनाया जाता है, तो कहीं दीवार पर चॉक से स्टंप बनते हैं। हर चौका लोगों की खिड़कियों तक पहुंचता है और हर आउट पर बहस होती है। यही वह माहौल है, जिसने बचपन में कई बड़े क्रिकेटरों को तैयार किया। कहा जाता है कि Sachin Tendulkar ने भी अपने शुरुआती दिनों में घंटों गली क्रिकेट खेला था। वहीं Rohit Sharma का बचपन भी मुंबई की इसी क्रिकेट संस्कृति के बीच बीता।

टेनिस बॉल क्रिकेट का अलग ही जुनून

मुंबई में टेनिस बॉल क्रिकेट सिर्फ टाइमपास नहीं होता। यहां हर मैच प्रतिष्ठा का सवाल बन जाता है। छोटी-छोटी टूर्नामेंट्स में भीड़ ऐसे जुटती है, जैसे कोई बड़ा फाइनल चल रहा हो। कई बार तो जीतने वाली टीम को ट्रॉफी से ज्यादा सम्मान मिलता है। यही कारण है कि मुंबई का हर बच्चा खुद को किसी बड़े खिलाड़ी से कम नहीं समझता।

सपनों से भरी रहती हैं मुंबई की गलियां

इन गलियों में खेलने वाले बच्चों के पास महंगे किट नहीं होते। लेकिन उनके पास जुनून होता है। कोई खुद को सचिन समझता है, तो कोई रोहित जैसा पुल शॉट खेलने की कोशिश करता है। शायद यही वजह है कि मुंबई ने भारतीय क्रिकेट को इतने बड़े सितारे दिए। यहां क्रिकेट सिर्फ खेला नहीं जाता, बल्कि जिया जाता है।

OLDISGOLDFILMS ऐसी ही पुरानी यादों और भारत की क्रिकेट संस्कृति की कहानियां आपके लिए लेकर आता रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *