जब भगवान घर-घर पहुंचे: राजा रवि वर्मा की वो खामोश क्रांति जिसने कला को हमेशा के लिए बदल दिया
क्या आपने कभी गौर किया है कि हमारे घरों, मंदिरों और कैलेंडरों में दिखने वाले देवी-देवताओं के चेहरे इतने जीवंत, इतने मानवीय क्यों लगते हैं? यह केवल संयोग नहीं था, बल्कि एक सोच-समझकर किया गया…

