हिंदू पौराणिक कथाओं में भस्मासुर की कहानी अहंकार, शक्ति के दुरुपयोग और बुद्धिमत्ता की जीत का एक अद्भुत उदाहरण है।
भस्मासुर एक राक्षस था, जो अत्यंत शक्तिशाली बनने की इच्छा रखता था। उसने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव उसके सामने प्रकट हुए और उसे वरदान मांगने को कहा।
भस्मासुर ने चतुराई से ऐसा वरदान मांगा कि वह जिसके सिर पर हाथ रख दे, वह तुरंत भस्म (राख) हो जाए। भगवान शिव ने बिना अधिक विचार किए उसे यह वरदान दे दिया।
वरदान मिलते ही भस्मासुर के मन में अहंकार आ गया। वह अपनी शक्ति को परखने के लिए स्वयं भगवान शिव के पीछे पड़ गया, ताकि उन्हें ही भस्म कर सके। यह देखकर भगवान शिव चिंतित हो गए और अपनी रक्षा के लिए भागने लगे।
तब भगवान विष्णु ने एक योजना बनाई। उन्होंने मोहिनी नामक एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया, जिसे मोहिनी कहा जाता है।
मोहिनी की सुंदरता देखकर भस्मासुर मोहित हो गया। उसने मोहिनी से विवाह करने की इच्छा जताई। मोहिनी ने एक शर्त रखी कि पहले भस्मासुर को उसके साथ नृत्य करना होगा और हर एक कदम की नकल करनी होगी।
भस्मासुर तैयार हो गया। नृत्य के दौरान मोहिनी ने धीरे-धीरे अपने हाथ सिर पर रखने की मुद्रा बनाई। भस्मासुर ने बिना सोचे-समझे उसकी नकल की और जैसे ही उसने अपने सिर पर हाथ रखा, वह स्वयं ही भस्म हो गया।
इस प्रकार भगवान विष्णु की बुद्धिमत्ता से भस्मासुर का अंत हुआ और भगवान शिव की रक्षा हुई।
सीख (Moral of the Story):
यह कहानी हमें सिखाती है कि शक्ति का उपयोग हमेशा समझदारी और संयम के साथ करना चाहिए। अहंकार और शक्ति का दुरुपयोग अंततः विनाश का कारण बनता है।
