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बैंक की नौकरी छोड़ बनीं बॉलीवुड की सबसे प्यारी मां! रीमा लागू की जिंदगी की वो कहानी, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं

बैंक की नौकरी छोड़ बनीं बॉलीवुड की सबसे प्यारी मां! रीमा लागू की जिंदगी की वो कहानी, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं
बैंक की नौकरी छोड़ बनीं बॉलीवुड की सबसे प्यारी मां! रीमा लागू की जिंदगी की वो कहानी, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं

हिंदी सिनेमा में कई हीरोइनें आईं और चली गईं।
कई चेहरे सुपरस्टार बने।
लेकिन एक चेहरा ऐसा भी था, जिसने बिना “हीरोइन” बने करोड़ों दिलों पर राज किया।

वो चेहरा था Reema Lagoo का।

पर्दे पर उनका आना मतलब घर जैसा अपनापन।
उनकी मुस्कान में मां की ममता दिखती थी।
उनकी आंखों में दर्द भी था और सुकून भी।

यही वजह रही कि Salman Khan से लेकर Shah Rukh Khan तक, हर बड़े स्टार की मां के रूप में दर्शकों ने उन्हें दिल से अपनाया।

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले रीमा लागू बैंक में नौकरी करती थीं।
वह Union Bank of India में क्लर्क थीं।
सुबह बैंक… और शाम को थिएटर।

यही उनकी जिंदगी थी।

फिर एक दिन ऐसा आया, जब उन्होंने सुरक्षित सरकारी नौकरी छोड़ दी और अभिनय को अपना सबकुछ बना लिया।
यहीं से शुरू हुई उस महिला की कहानी, जिसने बॉलीवुड में “मां” के किरदार को हमेशा के लिए बदल दिया।


असली नाम था नयन भडभडे, लेकिन दुनिया ने उन्हें रीमा लागू के नाम से जाना

Reema Lagoo का जन्म 21 जून 1958 को हुआ था।
उनका असली नाम नयन भडभडे था।

उनकी मां Mandakini Bhadbhade मराठी थिएटर की मशहूर अभिनेत्री थीं।
घर में अभिनय का माहौल था।
इसलिए बचपन से ही रीमा का झुकाव कला की तरफ होने लगा था।

उन्होंने छोटी उम्र में मराठी फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर काम भी किया।
लेकिन उस दौर में परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई करें और एक सुरक्षित नौकरी हासिल करें।

इसी वजह से उन्होंने बैंक की नौकरी जॉइन की।
1979 में वह Union Bank of India में कर्मचारी बनीं।

लेकिन दिल अब भी मंच पर धड़कता था।

बैंक के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जब उन्होंने अभिनय किया, तब सहकर्मी भी हैरान रह गए।
सबको महसूस हुआ कि यह महिला सिर्फ बैंक की कुर्सी के लिए नहीं बनी।
उसके अंदर एक कलाकार सांस ले रहा है।


बैंक की नौकरी छोड़ चुना संघर्ष भरा रास्ता

उस दौर में सरकारी नौकरी छोड़ना आसान नहीं था।
लोग जिंदगीभर ऐसी नौकरी पाने का सपना देखते थे।

लेकिन रीमा लागू ने वही नौकरी छोड़ दी।

क्योंकि उनका मन कैमरे और मंच में बस चुका था।

उन्होंने थिएटर करना शुरू किया।
धीरे-धीरे टीवी इंडस्ट्री में कदम रखा।

1985 में उनका टीवी डेब्यू शो Khandaan आया।
इसके बाद Shrimaan Shrimati और Tu Tu Main Main ने उन्हें घर-घर पहुंचा दिया।

उनकी कॉमिक टाइमिंग शानदार थी।
लोग उनके डायलॉग्स का इंतजार करते थे।

वह सिर्फ इमोशनल रोल नहीं निभाती थीं।
कॉमेडी में भी उनका जवाब नहीं था।

यही वजह रही कि टीवी इंडस्ट्री में भी उनका अलग मुकाम बना।


‘कयामत से कयामत तक’ से शुरू हुआ फिल्मों का सफर

1988 में Reema Lagoo ने Qayamat Se Qayamat Tak से बॉलीवुड में कदम रखा।
वह Juhi Chawla की मां बनी थीं।

उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यही अभिनेत्री आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे यादगार मां बनेगी।

फिर आई Maine Pyar Kiya।

Salman Khan की मां बनकर उन्होंने ऐसा असर छोड़ा कि लोग भावुक हो उठे।
उनकी आंखों में सच्चाई दिखती थी।
उनका प्यार नकली नहीं लगता था।

यहीं से रीमा लागू का जादू शुरू हुआ।

इसके बाद Saajan, Hum Aapke Hain Koun..!, Rangeela, Kuch Kuch Hota Hai और Kal Ho Naa Ho जैसी फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया।

हर फिल्म में उनका रोल छोटा होता था।
लेकिन असर सबसे बड़ा वही छोड़ती थीं।


जब उनकी एक्टिंग से श्रीदेवी भी असहज हो गईं

1993 में Gumrah रिलीज हुई।
इस फिल्म में Sridevi, Sanjay Dutt और रीमा लागू साथ नजर आए थे।

रीमा लागू ने श्रीदेवी की मां का किरदार निभाया था।

लेकिन शूटिंग के दौरान इंडस्ट्री में एक चर्चा तेजी से फैल गई।
कहा गया कि कई सीनों में रीमा लागू की एक्टिंग इतनी दमदार थी कि वह फिल्म की मुख्य अभिनेत्री पर भारी पड़ रही थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान उनके कुछ सीन कम कर दिए गए।
हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई।

लेकिन इंडस्ट्री में यह बात लंबे समय तक चर्चा में रही।

बताया जाता है कि निर्माता Yash Johar को इस बात का अफसोस था।
इसीलिए उन्होंने रीमा लागू से वादा किया कि आगे उनकी फिल्मों में मां का रोल वही निभाएंगी।

बाद में Duplicate, Kuch Kuch Hota Hai और Kal Ho Naa Ho में यही देखने को मिला।


प्यार हुआ, शादी हुई… लेकिन रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला

रीमा लागू की निजी जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी जैसी रही।

बैंक में नौकरी के दौरान उनकी मुलाकात अभिनेता Vivek Lagoo से हुई।
दोनों थिएटर से जुड़े थे।

धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई।
1978 में दोनों ने शादी कर ली।

शादी के बाद नयन भडभडे बन गईं — रीमा लागू।

कुछ साल बाद उनकी बेटी Mrunmayee Lagoo का जन्म हुआ।
लेकिन समय के साथ रिश्ते में दूरियां आने लगीं और दोनों अलग हो गए।

सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने कभी सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप नहीं लगाए।

तलाक के बाद भी दोनों ने प्रोफेशनल रिश्ता बनाए रखा।
कई साल बाद दोनों एक नाटक में साथ नजर आए।

लोग हैरान रह गए थे।
लेकिन विवेक लागू ने साफ कहा था कि निजी और पेशेवर रिश्ते अलग होते हैं।


आखिरी सांस तक अभिनय करती रहीं रीमा लागू

Reema Lagoo अभिनय को सिर्फ काम नहीं मानती थीं।
वह इसे अपनी जिंदगी समझती थीं।

फिल्मों के ऑफर कम हुए तो उन्होंने टीवी पर वापसी की।
वह Naamkarann में नजर आ रही थीं।

17 मई 2017 की शाम तक उन्होंने शूटिंग की।
सबकुछ सामान्य था।

लेकिन रात में उन्हें सीने में दर्द हुआ।
परिवार उन्हें मुंबई के Kokilaben Dhirubhai Ambani Hospital लेकर पहुंचा।

फिर अचानक खबर आई कि रीमा लागू अब नहीं रहीं।

18 मई 2017 की वह सुबह पूरे बॉलीवुड को रुला गई।
Salman Khan, Aamir Khan, Kajol और कई सितारे उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।

सबकी आंखें नम थीं।

क्योंकि बॉलीवुड ने सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं खोई थी।
उसने अपनी सबसे प्यारी मां खो दी थी।


आज भी क्यों अधूरी लगती है बॉलीवुड की मां वाली दुनिया?

रीमा लागू ने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।
उन्होंने मां के किरदार को सिर्फ रोने-धोने तक सीमित नहीं रखा।

उनकी मां आधुनिक भी थी और संस्कारी भी।
वह दोस्त भी बनती थीं और सहारा भी।

यही वजह रही कि लोग उन्हें असली मां जैसा महसूस करते थे।

आज भी जब Hum Aapke Hain Koun..! या Kal Ho Naa Ho टीवी पर आती है, तो लोग ठहर जाते हैं।

क्योंकि स्क्रीन पर सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं दिखती।
वह घर का हिस्सा लगती हैं।

रीमा लागू ने साबित किया था कि बिना ग्लैमर के भी स्टार बना जा सकता है।
सिर्फ सच्चे अभिनय से भी दिलों पर राज किया जा सकता है।

शायद इसलिए आज भी लोग कहते हैं—

“रीमा मां जैसी कोई नहीं।”

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